December 4, 2020

पीएम मोदी का देश से ‘चिट्ठी संवाद’

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पीएम मोदी का देश से ‘चिट्ठी संवाद’

कहावत है कि, नरेंद्र दामोदर दास मोदी नुमा विशाल बरगद का विराट पेड़ जहां तक अपनी छाया देता है वहां तक अपनी परिधि की भीतर किसी अन्य पेड़ यानी विपक्षी दलों को पनपने ही नहीं देता है। हालांकि बरगद के आसपास छोटे-छोटे दल नुमा पौधे उग तो जाते हैं लेकिन वो खुद को पेड़ के रूप में बदल नहीं पाते हैं और धीरे-धीरे मुरझाकर सूख यानी धराशायी हो जाते हैं। अगर देखा जाए तो साल 2014 से आजतक लगभग कुछ ऐसा ही होता नज़र आ रहा है। राजनीति ने अपने आप को किस तरह से बदला है ये हम सब देख रहे हैं। मानो ऐसा लगता है कि पूरी राजनीति की धुरी सिर्फ एक ही नाम पर आकर टिक गई हो, और वो नाम, देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रूप में जानती है। किसी ने कभी सोचा भी ना था, यहां तक कि खुद नरेंद्र मोदी ने भी कभी इसकी कल्पना भी नहीं की थी कि गुजरात का एक भूतपूर्व सीएम, देश का पीएम बनेगा। एक बार नहीं बल्कि दो-दो बार बनेगा और वोभी पूर्ण बहुमत के साथ बनेगा। लेकिन जो कल्पना से परे होता है शायद होता वही है। लेकिन इस लम्बी दौड़ में पीएम मोदी की कई कुर्बानियां भी शामिल हैं, जैसे घर का त्याग करना अपनी अर्धांगिनी का त्याग करना वगैरा-वगैरा। जिस तरह से मोदी बचपन से ही संघ की विचारधारा और अध्यात्म की महक को लेकर आगे बढ़े थे, आज उसी महक को उन्होंने दुनिया में बिखेरने का काम भी किया है। पीएम बनते ही अनेकों निर्णय लिए जिनमें कई निर्णयों की वजह से मोदी को खूब सराहा भी गया और कई बार किरकिरी भी हुई। देखिए जब कोई इंसान इस मृत्युलोक में जन्म लेता है तो वो परिपूर्ण नहीं होता लेकिन होने की भरसक कोशिश ज़रूर करता रहता है और करनी भी चाहिए और ऐसा ही सबकुछ नरेंद्र मोदी निरन्तर करते रहे हैं और अभी किए जा रहे हैं। कई बार तो विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेता भी अपनी पार्टी लाइन से हटकर पीएम मोदी की ऐसी तारीफ कर जाते हैं कि बाद में उन्हें अपनी ही पार्टी को नोटिस का जवाब देना पड़ जाता है और वो कहते हैं कि ये मेरी व्यक्तिगत राय है पार्टी की सोच नहीं है। हालांकि तमाम वरिष्ठ नेता चाहे जिस भी दल के हों अंदर ही अंदर वोभी मानते हैं कि शायद अभी मोदी की कोई काट नहीं है, अब इस बात को और भी सार्थक कुछ भविष्यवाणीयां भी कर देती हैं, जो पहले कभी किसी के द्वारा की गई होंगी और अब रह-रहकर उन्हें बताया भी जाता रहा है और ये सब आप पाठक भाई ने भी ज़रूर सुनी होंगी, खैर चलिए अब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी की ‘देश के नाम चिट्ठी’ का ज़िक्र किए देते हैं जिसमें स्वंय मोदी ने देश के लिए किन-किन बातों का ज़िक्र किया है अब ज़रा आप भी पढ़िए और समझिए कि इन सब बातों में से आपके काम की बातें क्या हैं…प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी सरकार का एक साल पूरा होने के मौके पर देश के नाम चिट्ठी लिखी है। यह चिट्ठी पूरे देश के अखबारों में छपी है। इसमें उन्होंने अपने अब तक के कार्यकाल की उपलब्घियां गिनाई। उन्होंने लिखा कि, पहले साल में सरकार ने जो काम किए उससे देश ने खोया हुआ विश्वास फिर से हासिल कर लिया है।
उन्होंने लिखा कि, अन्त्योदय हमारे राजनैतिक दर्शन का मूल मंत्र है। प्रमुख फैसले लेते समय हमेशा वंचित, गरीब, मजदूर और किसान हमारी आंखों के सामने रहते हैं। जन-धन योजना में हर परिवार का बैंक खाता और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमायोजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना एवं अटल पेन्शन योजना इसी का प्रमाण हैं। “अन्नदाता सुखी भव:”हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, सॉइल हेल्थ कार्ड, बिजली की बेहतर उपलब्धता, नई यूरिया नीति कृषि विकास के लिए हमारी प्रतिबद्धता है। बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से पीडित किसानों के साथ हम मजबूती से खड़े रहे। सहायता राशि को डेढ़ गुना किया।
इसके बाद भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बात करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिखा है, हम पारदर्शी, भ्रष्टाचार मुक्त, नीति आधारित तुरंत फै सले लेने वाला शासन चला रहे हैं। पहले देश के संसाधनों का आवंटन मनमानी से चहेते उद्योगपतियों को होता था, लेकिन अब हमने फैसला लिया है कि इनकी नीलामी होगी। कोयले के आवंटन से 3 लाख करोड़ रूपये और स्पेक्ट्रम से एक लाख रूपये करोड़ रूपये की आमदनी होगी। जब हमारी सरकार ने काम करना शुरू किया था, देश की आर्थिक स्थिति डांवाडोल थी। मगर अब न सिर्फ भारत दुनिया की सबसे तेजी से आगे बढ़ रही अर्थव्यवस्था बन गई है, बल्कि अब यहां निवेश भी बढ़ा है। इनके अलावा पीएम ने स्किल इंडिया, मेक इन इंडिया, मुद्रा बैंक, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, नमामि गंगे, डिजीटल इंडिया जैसे योजनाओं का भी जिक्र किया। अंत में उन्होंने राज्यों और केन्द्र के बीच संयोजन को लेकर कहाकि, सभी मुख्यमंत्रियों के साथ “टीम इंडिया” की अवधारणा भी दूरियां मिटाने की कोशिश है।

सुधा साव

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