February 27, 2021

कोरोना के लिए ‘गेमचेंजर दवा’ दवाई का आखिर क्या है चौंकाने वाला सच ?

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कोरोना के लिए ‘गेमचेंजर दवा’ दवाई का आखिर क्या है चौंकाने वाला सच ?
अमेरिका के न्यूयॉर्क में कोरोना वायरस के 1376 मरीजों पर हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा का ट्रायल किया गया. बता दें ये वही दवा है जो बहुत से देशों ने भारत से गुजारिश करके मंगवाई थी, लेकिन इस रिसर्च में यह पाया गया है कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन खाने वाले मरीजों की हालत में कुछ खास सुधार नहीं हुआ, बल्कि उनकी तबीयत और ज्यादा खराब हो गई.
रिसर्च में 60 फीसदी लोगों को दी गई दवा
वही इस रिसर्च में तकरीबन 60 फीसदी मरीजों को हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दी गई और बाकी मरीजों को ये दवा नहीं दी गई. फिर सभी मरीजों पर अध्य्यन किया गया.आपको बता दें इस रिसर्च को न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन ने छापा है. हालांकि भारत में अभी भी कई अस्पतालों में मरीजों को यह दवा एहतियातन दी जा रही है.
कई देश कर रहें है अपनी- अपनी दवा की वकालत
हमें यह भी देखना होगा कि अमेरिका गिलियर्ड कंपनी की रेमेडिसिविर दवा को कोरोना वायरस के इलाज के तौर पर पेश कर रहा है. ठीक इसी तरह कई देश अपनी-अपनी दवा की वकालत कर रहे हैं. ऐसे में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन पर सवाल उठाए जाने वाली इस रिसर्च को ग्लोबल परिप्रेक्ष्य में देखना जरूरी है.
ट्रंप ने दवा को बताया था गेम चेंजर
वही कुछ दिनों पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस दवा को गेमचेंजर करार दे चुके हैं और कई देश भारत से हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन का आयात भी कर रहे हैं.
इससे पहले भी आई स्टडी में इस दवा की वजह से दिल की धड़कन बढ़ने और अचानक मौत हो जाने जैसे गंभीर दुष्प्रभावों के बारे में बताया गया था. यही नहीं अमेरिका का Food and Drug Administration भी कोरोना वायरस के इलाज के लिए इस दवा का इस्तेमाल ना करने की चेतावनी दे चुका है.
यह दवा मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने के दो दिनों के अंदर दी गई. हालांकि पहले की गई कुछ स्टडीज में आलोचकों का कहना था कि अगर मरीजों पर इस दवा का इस्तेमाल देर से किया गया तो यह दवा कोई अच्छा असर नहीं दिखाएगी.

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