March 8, 2021

पक्ष विपक्ष की गंदी राजनिति से कोरोना काल का सबसे खतरनाक समय अब आ रहा है

पक्ष विपक्ष की गंदी राजनिति से कोरोना काल का सबसे खतरनाक समय अब आ रहा है:
दिल्ली-मुम्बई से पैदल आ रहे मजदूरों को देख कर देश में भावनाओं का ज्वार उमड़ पड़ा है। पक्ष विपक्ष दोनों लगे पड़े हैं कि किस तरह जल्द से जल्द इन्हें गाँव में पहुँचा दिया जाय। गाँव पहुँचने के बाद क्या होगा, इससे किसी को कोई मतलब नहीं…
राजस्थान के अनेक गाँवों की दशा देखिये! पैदल निकली भीड़ का एक छोटा हिस्सा ही गाँव पहुँचा है, और बगल के हाई स्कूल में बना कोरोन्टाइन सेंटर भर गया है।
इन लोगो में से अधिकांश रोज रात को अपने घर चले आते हैं, सुबह उठ कर फिर चले जाते हैं। गाँव का कोई सभ्य व्यक्ति टोक दे, तो मार-झगड़े की नौबत आ जा रही है।
यह स्थिति सिर्फ राजस्थान के गाँव की दशा नहीं है, उत्तर प्रदेश, बिहार आदि के लगभग हर गाँव की दशा है। कुछ गाँव वालों ने तो इनको सेंटर पर रोकने के लिए ऑर्केस्ट्रा लगवाया है। गाँव का भय समझ रहे हैं न?
गाँवों की ओर दौड़ती फौज का एक छोटा टुकड़ा ही गाँव पहुँचा है, और एकाएक इन राज्यों के गाँवों में कोरोना मरीजों की संख्या भरभरा के बढ़ने लगी है। अगले दस से पंद्रह दिनों में जब आधी फौज पहुँच जाएगी तो क्या होगा, यह ईश्वर ही जानता है।
गाँव के लोग जानते हैं कि मुंबई समेत अन्य महानगरों से आ रही भीड़ उनके लिए क्या ले कर आ रही है। कोरोना यदि एक बार गाँवों में पसर गया तो लाशों की गिनती तक सम्भव नहीं होगी… लोग डरे हुए हैं, पर गाँव के डरे हुए लोगों के लिए किसी के अंदर कोई सम्वेदना नहीं।
दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात , आंध्र प्रदेश , कर्नाटक में काम करने वाले मजदूरों की सँख्या हजार या लाख में नहीं, करोड़ में है। आप बिहार का उदाहरण लेवें। उस जैसा राज्य चाह कर भी इन सब की एक साथ व्यवस्था नहीं कर सकता। बिहार सरकार के पास संसाधन कितने कम हैं, यह बताने की आवश्यकता नहीं। स्थिति अधिक बिगड़ी तो हम अधिक से अधिक नीतीश को गाली दे सकते हैं, कुछ कर नहीं सकते…
बेहतर यही होता कि सरकार अपनी क्षमता के अनुसार धीरे धीरे लोगों को लाती, पर नहीं। बेहतर होता कि जो जहाँ है उसके लिए वहीं अच्छी व्यवस्था की जाती, पर नहीं। वामपंथियों के प्रोपोगेंडा के आगे सब बेबस हो गए हैं । सम्वेदना की बाढ़ आई हुई है। आंसुओं की नदियां बह चली हैं। हर पार्टी, हर पत्रकार, हर विचारक बेचैन है कि कैसे इस भीड़ को गाँव में झोंक दिया जाय। मरें गाँव वाले… हमारा क्या जाता है..
राजस्थान के पाली , जालोर , डूंगरपुर आदि जिले लगभग कोरोना मुक्त ही थे । अब पिछले 4 दिनों में इन जिलों में कोरोना का विस्फोट हो गया है । कोरोना पॉजिटिव का आंकड़ा भयावह रूप से बढ़ता जा रहा है … भीड़ अभी भी आ रही है। कल्पना कीजिये कि आने वाले समय मे हालात क्या होंगे …..
अभी एक तस्वीर दिखी जिसमें एक ट्रक पर पचासों लोग लदे हुए जा रहे हैं। तस्वीर देख कर लोगों का विचलित होना सहज ही है, लेकिन सच जानने वाले विचलित नहीं हुए थे। वे क्या, राजस्थान, बिहार या उत्तरप्रदेश का वह कोई भी व्यक्ति जो सूर्यनगरी , रणथंभोर ,जनसेवा, जननायक, न्यू जलपाईगुड़ी, सत्याग्रह, जम्मूतवी आदि गाड़ियों में एक बार भी बैठा हो वह बिचलित नहीं होगा। उस ट्रक में बैठे लोगों से अधिक बुरी दशा में इन राज्यों के लोग लगातार जाते रहे हैं। ट्रेन के लैट्रिन में खड़े हो कर चार चार लोग जाते हैं। लॉक डाउन के पहले तक…
साल छह महीने बाद जब कोरोना समाप्त होगा, तब यह भीड़ उसी तरह ट्रेनों में भर भर कर फिर उन्ही शहरों की ओर जाएगी। संवेदनाओं की बाढ़ तब नहीं आएगी, क्योंकि शहर में बैठे उद्योगपतियों, दुकानदारों, बुद्धिजीवियों को किसी भी कीमत पर मजदूर चाहिए। इन शहरों के वामपंथी मजदूर संगठनों को इन्ही की आवश्यकता है । वही लोग तब फोन कर कर के, लालच दे दे कर बुलाएंगे……
कोरोना काल का सबसे खतरनाक समय अब आ रहा है

अजय धीमान

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