October 31, 2020

रोटी, कपड़ा और मकान… गरीबों के पास आज भी इसका अभाव…

गरीबों का अपना घर देने का दावा करने वाले यूपी सरकार भले ही जगह-जगह ढिंढोरा पीटते फिर रहे हैं, लेकिन गरीबों को झोपड़ी आज तक नसीब नहीं हुई। हर गांव-गांव में ऐसे सैकड़ों परिवार हैं जो टूटी-फूटी झोपड़ी में अपना जीवन गुजार रहे हैं लेकिन इनके लिए आवास देने के लिए अधिकारियों का कोई ध्यान नहीं हैं। ऐसे प्रदेश सरकार के दावे खोखले साबित नजर आ रहे हैं। यूपी में ये कैसे हुआ। क्या इनकी मदद करने वाला कोई नहीं । सरकार गरीबों को रोटी कपड़ा मकान देने का जो वादा की थी वो पुरा क्यू नही कर रही। ऐसे कई सवाल है जो इन गरीबों को देख नजर आ रहा है

हम चांद पर बसने की जज्बा पाले हुए हैं लेकिन अभी भी गांवों के लोगों तक व वह सुविधाएं नहीं पहुंची है, जो जिन्दगी के लिए जरूरी है। ऐसा ही एक गांव है जहां सैकड़ों परिवार ऐसे है जिनके घर नहीं है वो टूटी झुग्गी झोपिडियो में रहते है जी हां हम बात कर रहे हैं यूपी के सरदारनगर के जो आपना पुरा जीवन बिता रहे है यहां शासन-प्रशासन की उपेक्षा की दंश झेल रहे यहां के बाशिंदों को जनप्रतिनिधियों से भी उम्मीदें टूट चुकी है। लोग बिजली, सड़क, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य की समस्या से आज भी जूझ रहे हैं। मेहनत मजदुरी कर अपने परिवार का भरण पोषण करने में मजबूर है। शौचालय नहीं होने के कारण महिलाएं खुले में शौच जाने के लिए मजबूर है बावजूद इसके गरीब परिवार को पीएम आवास के लिए वरियता सूची में नहीं डाला। जिससे गरीब परिवार पंचायत का बार बार चक्कर काटने को मजबूर हैं।

हमने इसी झोपड़ी में रहने वाले लोगों से बतचीत की उन्होंने बताया कि हमें आवास देने के लिए अधिकारियों का कोई ध्यान नहीं है ऐसे में सरकार के दावे खोखले साबित हो रहे है दरअसल सन 2011 में शासन द्वारा घरों का सर्वे करवाया गया था उसी आधार पर गरीबों ने सूची जोड़ा गया लेकिन जिन लोगों के हार्डवेयर और टिन नंबर की दुकानें है उनके नाम आवास योजना के सूची में शामिल है । ऐसे ही एक परिवार है जो अपने बच्चे और पत्नी के साथ साथ पोते पोती को लेकर झोपड़ी में गुजर बसर करते है। किशोरी ने बताया कि मेरा बेटा विकलांग है उनके दो बेटे है उसके बाद भी सरकार उनको सुविधा मुहैया नहीं करा रही है इस बारे में हैराया के प्रधान पति ने कहा कि किशोरी को आवास मिलना चाहिए।

Amritanjali Rai

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